रक्षा बंधन मुहूर्त 10 अगस्त 2014

इस वर्ष राखी का दिन रविवार 10 अगस्त 2014 को पड़ रहा है. इस दिन राखी बांधने के लिये कौन सा दिन शुभ रहेगा..

श्रावण मास की पूर्णिमा में भद्रा रहित समय में रक्षा की प्रतिक राखी बांधना विशेष शुभ रहता है. इस अवधि में ही रक्षा बंन्धन का पर्व पारम्परिक रुप से मनाने का विधान है. रक्षा बंधन में संक्रान्ति दिन और ग्रहण पूर्वकाल का विचार नहीं किया जाता है. इस वर्ष यह पर्व श्ऱ़़वण मास, पूर्णिमा तिथि, श्ऱ़़वण नक्षत्र, आयुष्मान् योग, वव करण, दिन रविवार में मनाया जायेगा.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त (Auspicious Muhurthas for Raksha Bandhan)
रविवार 10 अगस्त 2014, श्रवण पूर्णिमा के दिन राखी 1.06 (भद्राकाल की समाप्ति के बाद) कभी भी बांधी जा सकती है.

राखी विशेष शुभ मुहुर्त (Auspicious Muhurthas for Raksha Bandhan)
रविवार 10 अगस्त 2014, श्रवण पूर्णिमा में राखी बांधने का विशेष शुभ मुहुर्त 1.06 अपराहन से 5:00 बजे तक का रहेगा.

भद्रा काल (Bhadra time on Rakshna Bandhan Day) निषेध
मंगलवार 10 अगस्त 2014 के दिन भद्रा 1.06 दिन तक रहेगी. इसलिये 10 अगस्त 2014 अपराहन 1:06 बजे के बाद दिन में किसी भी समय पर राखी बांधना शुभ रहेगा. इस दिन इस अवधि तक रक्षा बंधन का त्यौहार नहीं मनाना चाहिए.

रक्षा बंधन: स्नेह की अटूट डोर (Astrological importance of Raksha Bandhan)
वेद शास्त्रों के अनुसार रक्षिका को आज के आधुनिक समय में राखी के नाम से जाना जाता है (The Rakshika is known as Rakhi in the modern times). रक्षा सूत्र को सामान्य बोलचाल की भाषा में राखी कहा जाता है. इसका अर्थ रक्षा करना, रक्षा को तत्पर रहना या रक्षा करने का वचन देने से है.

श्रावण मास की पूर्णिमा का महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि इस दिन पाप पर पुण्य, कुकर्म पर सत्कर्म और कष्टों के उपर सज्जनों का विजय हासिल करने के प्रयासों का आरंभ हो जाता है। जो व्यक्ति अपने शत्रुओं या प्रतियोगियों को परास्त करना चाहता है उसे इस दिन वरूण देव की पूजा करनी चाहिए (One shoul worship the Varun deva on Raskha bandhan).

दक्षिण भारत में इस दिन न केवल हिन्दू वरन् मुसलमान, सिक्ख और ईसाई सभी समुद्र तट पर नारियल और पुष्प चढ़ाना शुभ समझा जाता है नारियल को भगवान शिव का रुप माना गया है, नारियल में तीन आंखे होती है. तथा भगवान शिव की भी तीन आंखे है.

धागे से जुडे अन्य संस्कार (Other sanskaras of knot tying)
हिन्दू धर्म में प्रत्येक पूजा कार्य में हाथ में कलावा ( धागा ) बांधने का विधान है (Hindu puja ritual involves kalava tying). यह धागा व्यक्ति के उपनयन संस्कार से लेकर उसके अन्तिम संस्कार तक सभी संस्करों में बांधा जाता है. राखी का धागा भावनात्मक एकता का प्रतीक है. स्नेह व विश्वास की डोर है. धागे से संपादित होने वाले संस्कारों में उपनयन संस्कार, विवाह और रक्षा बंधन प्रमुख है।

पुरातन काल से वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। बरगद के वृक्ष को स्त्रियां धागा लपेटकर रोली, अक्षत, चंदन, धूप और दीप दिखाकर पूजा कर अपने पति के दीर्घायु होने की कामना करती है। आंवले के पेड़ पर धागा लपेटने के पीछे मान्यता है कि इससे उनका परिवार धन धान्य से परिपूर्ण होगा।

वह भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह अपनी बहन की रक्षा करने में समर्थ हो सके। श्रवण का प्रतीक राखी का यह त्यौहार धीरे-धीरे राजस्थान के अलावा अन्य कई प्रदेशों में भी प्रचलित हुआ और सोन, सोना अथवा सरमन नाम से जाना गया।

रक्षा बंधन मंत्र (Raksha Bandhan Mantra)
राखी बांधते समय बहनें निम्न मंत्र का उच्चारण करें, इससे भाईयों की आयु में वृ्द्धि होती है.

ऊं येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:

तेन त्वां प्रति बध्नामि, रक्षे मा चल मा चल